बॉलीवुड में कई सितारे आए और गए, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जिन्होंने पहली ही फिल्म से इतिहास रच दिया। दीपिका पादुकोण उन्हीं चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं। साल 2007 में रिलीज़ हुई उनकी डेब्यू फिल्म ‘ओम शांति ओम’ न सिर्फ एक सुपरहिट फिल्म बनी, बल्कि इसने दीपिका को रातों-रात स्टार बना दिया। इस फिल्म की सफलता इतनी बड़ी थी कि खुद शाहरुख़ ख़ान को यह कहना पड़ा कि आगे उन्हें दीपिका को ज्यादा फीस देनी होगी।
यह लेख उसी कहानी को विस्तार से बताता है—दीपिका की शुरुआत, उनकी फीस, फिल्म की सफलता और वह मोड़ जिसने उनके करियर की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।
करीब 19 साल बीत जाने के बाद भी वह पल आज तक लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है, जब दीपिका पादुकोण पहली बार किसी बॉलीवुड फिल्म में बड़े पर्दे पर नज़र आई थीं। साल 2007 में फराह ख़ान के निर्देशन में बनी सुपरहिट पुनर्जन्म पर आधारित फिल्म ‘ओम शांति ओम’ में दीपिका की एंट्री किसी सपने से कम नहीं थी। जैसे ही वह फिल्म में बीते ज़माने की मशहूर अदाकारा शांतिप्रिया के रूप में रेड कार्पेट पर चलती हुई दिखाई देती हैं, दर्शकों के साथ-साथ फिल्म के नायक शाहरुख़ ख़ान भी हैरान रह जाते हैं।
शाहरुख़, जो फिल्म में जूनियर आर्टिस्ट ओम मखीजा की भूमिका निभा रहे थे, खुद दीपिका की स्क्रीन प्रेज़ेंस से प्रभावित दिखते हैं। उनकी खूबसूरती, आत्मविश्वास और कैमरे के सामने सहजता ने यह साफ कर दिया था कि बॉलीवुड को एक नई स्टार मिल चुकी है।

हालांकि, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि ‘ओम शांति ओम’ दीपिका की पहली फिल्म नहीं थी। बॉलीवुड में कदम रखने से पहले ही वह अपने होम टर्फ बेंगलुरु में एक हिट फिल्म दे चुकी थीं। साल 2006 में रिलीज़ हुई कन्नड़ रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘ऐश्वर्या’, जिसे इंद्रजीत लंकेश ने निर्देशित किया था, दीपिका की असली पहली फिल्म थी। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य किरदार निभाया था और दर्शकों से भरपूर सराहना पाई थी।
‘ऐश्वर्या’ की सफलता ने दीपिका के लिए अभिनय की दुनिया के दरवाज़े खोल दिए। इसके बाद ‘ओम शांति ओम’ ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और वह रातों-रात बॉलीवुड की सबसे चर्चित नई अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। इस तरह, दीपिका का सफर कन्नड़ सिनेमा से शुरू होकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक शानदार मुकाम तक पहुंचा।
मॉडलिंग से बॉलीवुड तक: दीपिका पादुकोण का शुरुआती सफर
दीपिका पादुकोण का जन्म एक खेल परिवार में हुआ। उनके पिता प्रकाश पादुकोण भारत के महान बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। दीपिका ने शुरुआत में अभिनय नहीं बल्कि मॉडलिंग को अपना करियर चुना।
- उन्होंने कई बड़े फैशन शो में रैंप वॉक किया
- किंगफिशर कैलेंडर में आने के बाद उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली
- कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में दिखीं
हालांकि मॉडलिंग में सफल होने के बावजूद, बॉलीवुड में एंट्री किसी भी नए चेहरे के लिए आसान नहीं होती। लेकिन दीपिका के लिए किस्मत ने अलग रास्ता चुना।
दीपिका पादुकोण को अपनी पहली फ़िल्म कैसे मिली?
दीपिका पादुकोण के करियर की शुरुआत आज जितनी चमकदार दिखाई देती है, उसके पीछे उतनी ही दिलचस्प कहानी भी छिपी है। उनकी पहली फिल्म ‘ऐश्वर्या’ (2006) तक पहुँचने का सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था। इस कन्नड़ रोमांटिक ड्रामा के निर्देशक इंद्रजीत लंकेश ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में दीपिका के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनमें शुरू से ही कुछ खास था। उनके शब्दों में, “वह सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं हैं, बल्कि आज भी भारत की नंबर वन और सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री हैं। मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने उनके साथ काम किया।”
लंकेश ने बताया कि दीपिका में जन्मजात करिश्मा था। जब भी वह उन्हें देखते थे, उनकी मौजूदगी अपने आप ध्यान खींच लेती थी। दिलचस्प बात यह है कि दीपिका और लंकेश का परिचय बहुत पुराना था। बचपन में दोनों साथ में बैडमिंटन खेलते थे। दीपिका एक शानदार खिलाड़ी थीं और राज्य स्तर पर बैडमिंटन खेल चुकी थीं। वह बेहद अनुशासित और फोकस्ड थीं, जो उनके व्यक्तित्व में साफ झलकता था।
दीपिका के पिता प्रकाश पादुकोण, जो भारत के महान बैडमिंटन खिलाड़ियों में गिने जाते हैं, चाहते थे कि उनकी बड़ी बेटी भी खेल के क्षेत्र में ही आगे बढ़े। इसी दिशा में दीपिका ट्रेनिंग भी ले रही थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। इंद्रजीत लंकेश ने बताया कि जब वह निर्देशक बने, तो एक दिन उन्होंने दीपिका को एक फैशन शो में देखा। अगले ही दिन वह एक प्रमुख मैगज़ीन के कवर पर नज़र आईं। यह बदलाव उन्हें चौंका देने वाला लगा—एक गंभीर बैडमिंटन खिलाड़ी से सुपरमॉडल बनने तक का सफर।
लंकेश के मुताबिक, दीपिका की लंबाई करीब 5 फुट 9 इंच थी, उनका स्पोर्ट्स बॉडी स्ट्रक्चर बेहतरीन था, आंखें बेहद खूबसूरत थीं और चेहरा ऐसा था जो पूरे भारत में पसंद किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि ‘ऐश्वर्या’ के लिए वह बिल्कुल ऐसी ही लड़की की तलाश में थे। ज़्यादा सोचे बिना उन्होंने दीपिका को फोन किया और मुंबई में उनसे मुलाकात की। उस समय दीपिका के साथ उनकी मैनेजर पूजा ददलानी थीं, जो आज शाहरुख़ ख़ान की मैनेजर हैं।
इस तरह, खेल के मैदान से फैशन रैंप और फिर फिल्मों तक का दीपिका पादुकोण का सफर ‘ऐश्वर्या’ से शुरू हुआ, जिसने आगे चलकर उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।
‘ओम शांति ओम’ कैसे बनी दीपिका की डेब्यू फिल्म
संजय लीला भंसाली की असिस्टेंट रह चुकीं फराह ख़ान जब अपनी निर्देशित फिल्म ‘ओम शांति ओम’ की तैयारी कर रही थीं, तब उन्हें एक नए चेहरे की तलाश थी।
फराह ख़ान को चाहिए थी:
- फ्रेश लुक
- ग्लैमर और मास अपील
- शाहरुख़ ख़ान के सामने स्क्रीन प्रेज़ेंस
कई ऑडिशन के बाद दीपिका को चुना गया। यह फैसला जोखिम भरा था, क्योंकि फिल्म का बजट बड़ा था और लीड एक्ट्रेस बिल्कुल नई थी। लेकिन यही जोखिम आगे चलकर मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ।

दीपिका पादुकोण की पहली फिल्म की फीस कितनी थी?
ससबसे ज़्यादा चर्चा का विषय यही रहा कि दीपिका पादुकोण को ‘ओम शांति ओम’ के लिए कितनी फीस मिली थी। चूँकि यह उनकी पहली हिंदी फिल्म थी और वह उस समय बॉलीवुड में एक नया चेहरा थीं, इसलिए उनकी फीस को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, दीपिका को इस फिल्म के लिए लगभग ₹70 लाख से ₹1 करोड़ के बीच भुगतान किया गया था। उस दौर में किसी भी नई अभिनेत्री के लिए यह राशि काफी अच्छी और सम्मानजनक मानी जाती थी, खासकर तब जब इंडस्ट्री में डेब्यू करने वाली ज्यादातर अभिनेत्रियों को इससे कहीं कम फीस मिलती थी।

हालांकि, अगर फिल्म के हीरो शाहरुख़ ख़ान की फीस से तुलना की जाए, तो दीपिका की फीस उससे कई गुना कम थी। यह स्वाभाविक भी था, क्योंकि शाहरुख़ उस समय पहले से ही बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार थे और फिल्म की कमर्शियल सफलता का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते थे। बावजूद इसके, दीपिका ने अपनी पहली ही फिल्म में यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक नई अभिनेत्री नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी स्टार हैं।

खास बात यह रही कि ‘ओम शांति ओम’ की अपार सफलता के बाद खुद शाहरुख़ ख़ान ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि अब दीपिका को अगली फिल्मों में ज्यादा पैसा देना पड़ेगा। यह बयान भले ही हंसी-मज़ाक में दिया गया हो, लेकिन इसके पीछे एक सच्चाई छिपी थी। फिल्म की सफलता के बाद दीपिका की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी, उनकी मांग इंडस्ट्री में बढ़ने लगी और इसके साथ ही उनकी फीस में भी लगातार इज़ाफा हुआ। यही वजह है कि बहुत कम समय में वह बॉलीवुड की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों की सूची में शामिल हो गईं।
‘ओम शांति ओम’ की रिकॉर्डतोड़ सफलता
2007 में रिलीज़ होते ही ‘ओम शांति ओम’ बॉक्स ऑफिस पर छा गई।
फिल्म की उपलब्धियां:
- साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल
- भारत और विदेशों में जबरदस्त ओपनिंग
- म्यूज़िक सुपरहिट रहा
- शाहरुख़ और दीपिका की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया
दीपिका के लिए यह सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं थी, बल्कि स्टारडम का टिकट थी।

शाहरुख़ ख़ान का बयान: “अब फीस बढ़ानी पड़ेगी”
फिल्म ओम शांति ओम की ज़बरदस्त सफलता के बाद शाहरुख़ ख़ान ने कई इंटरव्यूज़ में दीपिका पादुकोण की खुलकर सराहना की। उन्होंने मज़ाकिया लहजे में कहा था कि अब दीपिका की अगली फिल्मों के लिए फीस बढ़ानी पड़ेगी, क्योंकि वह एक सच्ची सुपरस्टार बनकर उभरी हैं। हालांकि यह बात हल्के-फुल्के अंदाज़ में कही गई थी, लेकिन इसके पीछे एक गहरी सच्चाई छिपी हुई थी। शाहरुख़ ख़ान ने यह भी माना कि दीपिका की स्क्रीन प्रेज़ेंस असाधारण है और उन्होंने पहली ही फिल्म में ऐसा आत्मविश्वास दिखाया, जो आमतौर पर अनुभवी अभिनेत्रियों में ही देखने को मिलता है।
दीपिका का अभिनय, उनकी शालीनता और कैमरे के सामने सहजता ने दर्शकों के साथ-साथ इंडस्ट्री के लोगों को भी प्रभावित किया। शाहरुख़ के इस बयान को फिल्म इंडस्ट्री में एक तरह की ‘स्टार अप्रूवल’ माना गया, जिसने दीपिका के करियर को और तेज़ रफ्तार दी। इसके बाद उनकी मांग लगातार बढ़ती गई और बड़े बैनर की फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। धीरे-धीरे उनकी फीस में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और वह बहुत कम समय में बॉलीवुड की A-लिस्ट अभिनेत्रियों की कतार में शामिल हो गईं। यह कहना गलत नहीं होगा कि शाहरुख़ ख़ान का यह बयान दीपिका के चमकते सितारे की एक शुरुआती पहचान था।
‘ओम शांति ओम’ के बाद दीपिका का करियर ग्राफ
ओम शांति ओम से शानदार डेब्यू करने के बाद दीपिका पादुकोण ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहली ही फिल्म की ऐतिहासिक सफलता ने उन्हें इंडस्ट्री में मज़बूत पहचान दिला दी और वह बहुत कम समय में बड़े फिल्ममेकर्स की पसंदीदा अभिनेत्री बन गईं। इसके बाद लगातार उन्हें बड़े बजट की फिल्मों के ऑफर मिलने लगे, जिनमें उन्होंने टॉप निर्देशकों और नामी अभिनेताओं के साथ काम किया।
दीपिका ने अपने करियर की शुरुआत में ही यह साबित कर दिया कि वह केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने रोमांटिक, ड्रामा, एक्शन और गंभीर विषयों पर आधारित फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता को साबित किया। हर नई फिल्म के साथ उनका आत्मविश्वास और परिपक्वता साफ दिखाई देने लगी, जिससे दर्शकों और समीक्षकों दोनों का भरोसा उन पर बढ़ता गया।
धीरे-धीरे दीपिका की छवि एक खूबसूरत चेहरे से आगे बढ़कर एक सशक्त और भरोसेमंद अभिनेत्री की बन गई। उन्होंने ऐसे किरदार चुने, जिनमें भावनात्मक गहराई और दमदार प्रदर्शन की गुंजाइश थी। इसी संतुलन ने—जहाँ ग्लैमर और अभिनय साथ-साथ चले—उन्हें बॉलीवुड की सबसे सफल और सम्मानित अभिनेत्रियों की सूची में ला खड़ा किया। आज उनका करियर ग्राफ इस बात का उदाहरण है कि सही शुरुआत, मेहनत और समझदारी भरे फैसले किसी कलाकार को शीर्ष तक पहुँचा सकते हैं।
क्यों ‘ओम शांति ओम’ आज भी याद की जाती है?
जब भी बॉलीवुड की सबसे यादगार डेब्यू फिल्मों की चर्चा होती है, तो ‘ओम शांति ओम’ का नाम अपने आप सामने आ जाता है। यह फिल्म सिर्फ एक व्यावसायिक रूप से सफल प्रोजेक्ट नहीं थी, बल्कि इसने हिंदी सिनेमा को एक नई ऊर्जा और एक नई स्टार दी। इसकी कहानी, जो पुनर्जन्म और प्रेम की भावनाओं को मनोरंजक अंदाज़ में पेश करती है, दर्शकों को आज भी आकर्षित करती है। फिल्म की स्क्रिप्ट में भावनाओं, हास्य और ड्रामा का ऐसा संतुलन था, जिसने इसे हर वर्ग के दर्शकों के लिए खास बना दिया।
फिल्म का संगीत भी इसकी यादगार पहचान का एक बड़ा कारण है। इसके गाने आज भी पार्टियों, रेडियो और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हैं। शाहरुख़ ख़ान का करिश्माई अभिनय फिल्म को और ऊँचाई देता है, वहीं उनकी कॉमिक टाइमिंग और भावनात्मक दृश्यों ने दर्शकों को गहराई से जोड़ा।
इसके साथ ही, दीपिका पादुकोण की यह फिल्मी शुरुआत इतनी प्रभावशाली थी कि वह आज भी मिसाल के तौर पर याद की जाती है। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस, आत्मविश्वास और शालीनता ने पहली ही फिल्म में दर्शकों का दिल जीत लिया। समय के साथ ‘ओम शांति ओम’ को एक कल्ट स्टेटस मिल गया, जिसे बार-बार देखा जाना पसंद किया जाता है। यही वजह है कि यह फिल्म नए कलाकारों के लिए आज भी एक उदाहरण मानी जाती है, जो यह साबित करती है कि सही फिल्म से की गई शुरुआत किसी भी करियर की दिशा बदल सकती है।
दीपिका पादुकोण ने ओम शांति ओम के बाद लगातार ऐसी फ़िल्में कीं
दीपिका पादुकोण ने ओम शांति ओम के बाद लगातार ऐसी फ़िल्में कीं, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद और सफल अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। रोमांस से लेकर एक्शन और ऐतिहासिक किरदारों तक, उन्होंने हर जॉनर में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
उनकी प्रमुख ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों में लव आज कल, ये जवानी है दीवानी, चेन्नई एक्सप्रेस, गोलियों की रासलीला: राम-लीला, पीकू, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत, पठान, जवान और कल्कि 2898 एडी शामिल हैं।
इन फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए, बल्कि दीपिका की अभिनय-रेंज और स्टार पावर को भी साबित किया।
आगे की बात करें तो, वह जल्द ही शाहरुख़ ख़ान के साथ फ़िल्म King में नजर आने की उम्मीद हैं। इसके अलावा, अल्लू अर्जुन के साथ एटली की अपकमिंग एक्शन फ़िल्म Raaka भी चर्चा में है।
दीपिका का यह सफर दिखाता है कि सही शुरुआत और लगातार मेहनत कैसे एक कलाकार को नई ऊंचाइयों तक ले जाती है। Stay tuned!
FAQs
1. दीपिका पादुकोण की पहली फिल्म कौन सी थी?
उत्तर: दीपिका पादुकोण की पहली बॉलीवुड फिल्म ‘ओम शांति ओम’ थी।
2. ‘ओम शांति ओम’ किस साल रिलीज़ हुई थी?
उत्तर: यह फिल्म साल 2007 में रिलीज़ हुई थी।
3. दीपिका को पहली फिल्म के लिए कितनी फीस मिली थी?
उत्तर: रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें करीब ₹70 लाख से ₹1 करोड़ मिले थे।
4. ‘ओम शांति ओम’ का निर्देशक कौन था?
उत्तर: इस फिल्म का निर्देशन फराह ख़ान ने किया था।
5. फिल्म में दीपिका ने कौन सा किरदार निभाया था?
उत्तर: उन्होंने शांति प्रिया और सैंडी का डबल रोल निभाया था।
6. क्या यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट थी?
उत्तर: हां, यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी।
7. शाहरुख़ ख़ान ने दीपिका के बारे में क्या कहा था?
उत्तर: उन्होंने कहा था कि अगली बार दीपिका को ज्यादा फीस देनी होगी।
8. ‘ओम शांति ओम’ के बाद दीपिका का करियर कैसा रहा?
उत्तर: उनका करियर तेजी से ऊपर गया और वह टॉप अभिनेत्री बन गईं।
9. क्या दीपिका पहले मॉडल थीं?
उत्तर: हां, वह बॉलीवुड में आने से पहले सफल मॉडल थीं।
10. क्या ‘ओम शांति ओम’ आज भी लोकप्रिय है?
उत्तर: हां, यह फिल्म आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
11. दीपिका को इस फिल्म से क्या सबसे बड़ा फायदा मिला?
उत्तर: उन्हें स्टारडम और पहचान मिली।
12. क्या यह दीपिका की सबसे यादगार फिल्मों में से एक है?
उत्तर: बिल्कुल, यह उनकी करियर की सबसे अहम फिल्म मानी जाती है।