झारखंड राज्यसभा चुनाव में ‘इंडिया गठबंधन’ क्यों दिखा गया कमजोर? जानें परिमल नाथवानी की अहम भूमिका

झारखंड में गुरुवार शाम राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजों ने सियासी हलचल तेज कर दी। चुनाव परिणाम घोषित होते ही एक ओर जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन को एक सीट पर जीत मिली, वहीं दूसरी सीट पर नतीजा पूरी तरह चौंकाने वाला रहा। इस सीट पर क्रॉस-वोटिंग के बीच एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की।

परिमल नाथवानी को कुल 28 वोट मिले, जिसके आधार पर उन्हें विजेता घोषित किया गया। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोटों पर संतोष करना पड़ा। इस परिणाम ने INDIA गठबंधन के भीतर मतभेदों और रणनीतिक कमजोरी को भी उजागर किया है, क्योंकि क्रॉस-वोटिंग ने पूरे चुनाव का रुख बदल दिया।

इस जीत के साथ ही परिमल नाथवानी चौथी बार राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं। उनकी यह सफलता न सिर्फ एनडीए के लिए अहम मानी जा रही है, बल्कि झारखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरण भी पैदा कर सकती है।

राज्यसभा जीत पर परिमल नाथवानी का भावुक बयान

झारखंड से राज्यसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद परिमल नाथवानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि राज्यसभा सदस्य के रूप में चौथे कार्यकाल में देश की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व और कृतज्ञता का विषय है। नाथवानी ने कहा कि यह पल उनके लिए बेहद भावुक है, क्योंकि यह झारखंड से उनका तीसरा कार्यकाल होगा। उन्होंने जनता, समर्थकों और सहयोगियों का आभार जताते हुए भरोसा दिलाया कि वे पहले की तरह ही राज्य और देश के हित में पूरी निष्ठा से काम करते रहेंगे। उनके इस संदेश को राजनीतिक गलियारों में व्यापक समर्थन और सराहना मिल रही है, वहीं उनकी जीत को झारखंड की राजनीति में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने अपने संदेश में कहा, परिमल नाथवानी के लिए यह धरती खास महत्व रखती है, क्योंकि यहीं से वर्ष 2008 में उनकी संसदीय यात्रा की शुरुआत हुई थी। अपनी कर्मभूमि में एक बार फिर लौटना उनके लिए गर्व और विनम्रता से भरा क्षण है। उन्होंने इस अवसर को जीवन का यादगार पल बताते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

इसके साथ ही नाथवानी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन और समर्थन से ही यह सफलता संभव हो पाई है और वे आगे भी पूरी निष्ठा से सेवा करते रहेंगे।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग विवाद और सियासी बयानबाज़ी

झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद इंडिया गठबंधन के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने राजद और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के विधायकों पर आरोप लगाया कि उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं दिया, जिसके कारण प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। इंडिया गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के 4 और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के 2 विधायक शामिल हैं।

कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सभी 16 वोट सुरक्षित थे और झामुमो के 4 वोटों के साथ कुल 20 वोट मिले, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार ने कथित तौर पर धनबल का इस्तेमाल कर परिणाम अपने पक्ष में मोड़ा। हालांकि, इन आरोपों को पूर्व सीपीआई (एमएल) विधायक विनोद सिंह ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व अपनी कमियों पर पर्दा डाल रहा है और उनके विधायकों ने नियमों के तहत मतदान किया।

इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी को बधाई दी। वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नाथवानी का झारखंड से पुराना जुड़ाव रहा है और उनके चुने जाने से राज्य के विकास को नई गति मिलेगी।

जाने कौन हैं परिमल नाथवानी?

परिमल नाथवानी भारत के प्रमुख उद्योगपति और राजनेता हैं, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में कॉर्पोरेट अफेयर्स के डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वे भारतीय कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ राजनीति में भी एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वह गुजरात फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर बोर्ड के सदस्य भी हैं। राजनीतिक करियर में उन्होंने झारखंड से राज्यसभा सदस्य के रूप में जीत दर्ज की है और यह उनका चौथा कार्यकाल होगा। उनकी पहचान एक ऐसे कॉर्पोरेट लीडर के रूप में है जो व्यवसाय, खेल प्रशासन और धार्मिक संस्थानों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

रिलायंस समूह में उनकी रणनीतिक भूमिका और राजनीतिक संपर्क उन्हें भारतीय कॉर्पोरेट जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाते हैं। वे लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं, जिससे उनकी छवि एक अनुभवी नेता और प्रशासक की बनती है। उनका अनुभव और बहुआयामी योगदान उन्हें भारत के प्रमुख कॉर्पोरेट और राजनीतिक हस्तियों में शामिल करता है। और मीडिया में भी लगातार चर्चा में रहते हैं।

व्यापार से राजनीति तक परिमल नाथवानी का प्रेरणादायक सफ़र

परिमल नाथवानी का जीवन व्यापार, संघर्ष और राजनीतिक सफलता की एक लंबी कहानी है। लगभग 70 वर्ष के परिमल नाथवानी ने अपने शुरुआती दिनों में मुंबई में कोल्ड ड्रिंक के बाद साबुन की फैक्ट्री लगाकर कारोबार की शुरुआत की थी। इसके बाद 1990 के दशक में उन्होंने गुजरात के वडोदरा में लगभग 40 पीसीओ बूथ भी संचालित किए, जिससे उनका छोटे स्तर का व्यवसाय लगातार आगे बढ़ता गया।

शेयर बाजार में निवेश के दौरान उन्हें बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा, जिससे वे मानसिक तनाव से भी गुजरे। लेकिन 1997 में उनकी मुलाकात धीरूभाई अंबानी से हुई, जिसने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी।

इसके बाद उन्होंने जामनगर भूमि अधिग्रहण और परियोजना विकास में अहम भूमिका निभाई, जिसके तहत दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी स्थापित हुई। इस सफलता ने उन्हें रिलायंस इंडस्ट्रीज के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब ला दिया।

मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत माने जाते हैं। उनकी रणनीतिक समझ के कारण उन्हें जियो नेटवर्क के विस्तार जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। आज वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं और पिछले तीन दशकों से व्यापार, राजनीति और खेल प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे वडोदरा स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

परिमल नाथवानी का राज्यसभा सफ़र और राजनीतिक जीत

परिमल नाथवानी ने भारतीय राजनीति में अपनी पहचान झारखंड से राज्यसभा सांसद के रूप में बनाई। वह पहली बार वर्ष 2008 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा के लिए चुने गए थे। यह जीत बेहद दिलचस्प मानी जाती है क्योंकि उन्हें क्रॉस वोटिंग का लाभ मिला और बहुत कम अंतर से सफलता हासिल हुई थी। उस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी खुले तौर पर उनका समर्थन किया था, जिससे उनकी जीत आसान हुई।

झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार मनीष आनंद के अनुसार, उस चुनाव में राजनीतिक समीकरण काफी जटिल थे, लेकिन क्रॉस वोटिंग ने परिणाम को उनके पक्ष में कर दिया। यह उनकी राजनीतिक पकड़ और विभिन्न दलों के बीच स्वीकार्यता को दर्शाता है।

इसके बाद परिमल नाथवानी को दूसरी बार भी झारखंड से ही राज्यसभा में निर्दलीय सांसद बनने का अवसर मिला। उनका दूसरा कार्यकाल अप्रैल 2014 से 2020 तक चला। इस दौरान भी उनका राजनीतिक प्रभाव बना रहा और उन्होंने संसद में सक्रिय भूमिका निभाई।

वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक सिंह (BBC) के अनुसार, दूसरी बार उन्हें कांग्रेस के अंदरूनी समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत मिली थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि नाथवानी केवल कॉर्पोरेट जगत तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राजनीति में भी उनकी स्वीकार्यता और प्रभाव लगातार बढ़ता गया।

FAQs

1. परिमल नाथवानी कौन हैं?

परिमल नाथवानी एक भारतीय उद्योगपति, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर और राज्यसभा सांसद हैं।

2. परिमल नाथवानी का व्यापारिक सफर कैसे शुरू हुआ?

उन्होंने मुंबई में छोटे स्तर पर कोल्ड ड्रिंक और साबुन की फैक्ट्री से अपने व्यापार की शुरुआत की थी।

3. क्या परिमल नाथवानी को शुरुआती कारोबार में नुकसान हुआ था?

हाँ, शेयर बाजार में निवेश के दौरान उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ, जिससे उन्हें कठिन दौर से गुजरना पड़ा।

4. धीरूभाई अंबानी से उनकी मुलाकात कब हुई?

उनकी मुलाकात 1997 में धीरूभाई अंबानी से हुई, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।

5. जामनगर प्रोजेक्ट में उनकी क्या भूमिका थी?

उन्होंने जामनगर भूमि अधिग्रहण और रिफाइनरी परियोजना में अहम भूमिका निभाई, जहां दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी स्थापित हुई।

6. क्या परिमल नाथवानी राजनीति में भी सक्रिय हैं?

हाँ, वे झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और उनका यह चौथा कार्यकाल है।

7. उनका पहला राज्यसभा चुनाव कब हुआ था?

उन्होंने 2008 में झारखंड से निर्दलीय सांसद के रूप में पहली बार राज्यसभा में प्रवेश किया था।

8. उनका दूसरा राज्यसभा कार्यकाल कब था?

उनका दूसरा कार्यकाल अप्रैल 2014 से 2020 तक चला।

9. परिमल नाथवानी किन क्षेत्रों में सक्रिय हैं?

वे व्यापार, राजनीति, खेल प्रशासन और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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