New wave of Russian attacks on Ukraine
यूक्रेन में चल रहा युद्ध एक बार फिर अत्यंत भयावह मोड़ पर पहुंच गया है। हाल के दिनों में रूसी सेनाओं द्वारा किए गए तीव्र और व्यापक हमलों ने राजधानी कीव सहित कई प्रमुख शहरों को गहरी चोट पहुंचाई है। विशेष रूप से घनी आबादी वाले रिहायशी इलाक़ों को निशाना बनाए जाने से आम नागरिकों में दहशत फैल गई है। अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 90 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें महिलाएं, बुज़ुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं।
हमलों के बाद कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने आपात सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा है, वहीं अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्थिति को मानवीय संकट की ओर बढ़ता हुआ बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिक इलाक़ों पर इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। आने वाले समय में इस संघर्ष के और तेज़ होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। युद्ध के इस नए चरण ने एक बार फिर शांति वार्ताओं की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है।
कीव पर हमले और बचाव अभियान, मलबे में ज़िंदगी की तलाश
रूसी हमलों के बाद कीव के कई इलाक़ों में रिहायशी इमारतें पूरी तरह ढह गईं। बहुमंज़िला अपार्टमेंट, बाज़ार, होटल और नागरिक सुविधाएँ या तो नष्ट हो गईं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह अब तक का सबसे व्यापक हमला माना जा रहा है। धमाकों की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि शहर के लगभग हर हिस्से में नुकसान की खबरें सामने आईं।

संयुक्त राष्ट्र के यूक्रेन में शीर्ष मानवतावादी अधिकारी माथियास श्माले ने बताया कि ढही हुई इमारतों के मलबे में फँसे लोगों को निकालने के लिए खोज और बचाव अभियान लगातार जारी हैं। उन्होंने विशेष रूप से एक 15 महीने की बच्ची और उसके परिवार का उल्लेख किया, जो मलबे में दबे होने की आशंका में हैं। यह उदाहरण इस बात को रेखांकित करता है कि युद्ध का सबसे भयावह असर मासूम नागरिकों पर पड़ रहा है।
हमलों के दौरान कीव के लाखों निवासियों को लगभग 11 घंटे तक बम शरणालयों या अपने घरों के भीतर छिपकर रहना पड़ा। “युद्ध की दहला देने वाली आवाज़ों” के बीच बिताई गई यह रात शहर के लोगों के लिए गहरे मानसिक आघात का कारण बनी। कई इलाक़ों को एहतियातन खाली कराया गया, ताकि आगे के हमलों से जान-माल की हानि को कम किया जा सके।
नागरिक ढांचे पर हमला और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
इन हमलों की एक चिंताजनक बात यह रही कि केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि नागरिक ढांचे को भी व्यापक रूप से निशाना बनाया गया। एक एम्बुलेंस स्टेशन पर हुए हमले में कई स्वास्थ्यकर्मी और एम्बुलेंस चालक घायल हो गए, जबकि कई वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इससे आपात चिकित्सा सेवाओं पर भारी दबाव पड़ा है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई रिहायशी इमारतों में आग लग गई, जिसे बुझाने में दमकलकर्मियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। एक होटल और कई बाज़ार क्षेत्रों में भी आग की घटनाएँ सामने आईं। ऐसे हमले न केवल तत्काल जान-माल का नुकसान करते हैं, बल्कि लंबे समय तक शहर की सामान्य जीवन-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन के आँकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच नागरिक हताहतों की संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक रही है। यह आँकड़ा बताता है कि संघर्ष की तीव्रता बढ़ रही है और इसका सबसे बड़ा बोझ आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।
मानवीय संकट, मानसिक स्वास्थ्य और अंतरराष्ट्रीय क़ानून
लगातार हो रहे हमलों ने यूक्रेन में एक गहरे मानवीय संकट को जन्म दिया है। देशभर में सहायता संगठन रूसी हमलों से प्रभावित लगभग 10 लाख लोगों को आपात मदद पहुँचा रहे हैं। इस सहायता में प्राथमिक उपचार, अस्थायी आश्रय, सुरक्षा, नक़द सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर युद्ध का असर अक्सर दिखाई नहीं देता, लेकिन यह उतना ही गहरा और स्थायी होता है। माथियास श्माले ने चेतावनी दी कि हर हमले से होने वाला नुकसान और डर लोगों के मानसिक आघात को और बढ़ा देता है। जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता है, ये “अदृश्य घाव” और भी गहरे होते जाते हैं, जिनका असर पीढ़ियों तक रह सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत नागरिकों की सुरक्षा अनिवार्य है। संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि घनी आबादी वाले इलाक़ों पर हमले अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकते हैं। श्माले ने कहा कि कीव और देश के अन्य हिस्सों में नागरिकों को अगले हमले के डर में नहीं जीना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगातार अपील की जा रही है कि वह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।
क्षेत्रीय तनाव, जवाबी हमले और आगे की राह
जहाँ एक ओर यूक्रेन में तबाही का मंजर है, वहीं दूसरी ओर रूस और उसके क़ब्ज़े वाले क्रीमिया में भी ड्रोन हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्टों में इन हमलों को यूक्रेनी सेनाओं से जोड़ा गया है। इन ड्रोन हमलों के कारण तेल प्रतिष्ठानों का कामकाज प्रभावित हुआ है और मॉस्को के कुछ हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
यह स्थिति बताती है कि संघर्ष केवल एकतरफ़ा नहीं रह गया है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता जा रहा है। रूस ने 24 फ़रवरी 2022 को यूक्रेन पर व्यापक आक्रमण शुरू किया था, और तब से यह युद्ध कई चरणों से गुजर चुका है। वर्तमान घटनाएँ संकेत देती हैं कि निकट भविष्य में भी शांति की राह आसान नहीं है।
आगे की राह में कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवीय सहायता की भूमिका निर्णायक होगी। यदि संघर्ष इसी तरह जारी रहता है, तो इसका प्रभाव केवल यूक्रेन या रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता, ऊर्जा बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
FAQs
1. कीव में हालिया हमलों में कितनी मौतें हुई हैं?
कम से कम 18 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
2. कितने लोग घायल बताए जा रहे हैं?
लगभग 90 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई बच्चे शामिल हैं।
3. क्या रिहायशी इलाक़ों को निशाना बनाया गया?
हाँ, घनी आबादी वाले रिहायशी इलाक़ों को भारी नुकसान पहुँचा है।
4. बचाव अभियान किस स्तर पर चल रहा है?
ढही इमारतों के मलबे में फँसे लोगों को निकालने के लिए लगातार खोज और बचाव अभियान चल रहा है।
5. संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्या है?
संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता, निगरानी और नागरिक सुरक्षा की अपील कर रहा है।
6. क्या स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हुई हैं?
हाँ, एक एम्बुलेंस स्टेशन पर हमला हुआ और कई स्वास्थ्यकर्मी घायल हुए।
7. मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा है?
लगातार हमलों से नागरिकों में गहरा मानसिक आघात और डर बढ़ा है।
8. कितने लोगों को बम शरणालयों में रहना पड़ा?
कीव के लाखों लोगों को लगभग 11 घंटे तक शरणालयों में रहना पड़ा।
9. क्या अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन हुआ है?
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, नागरिक इलाक़ों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के ख़िलाफ़ हो सकते हैं।
10. यूक्रेन में कितने लोगों को आपात मदद दी जा रही है?
लगभग 10 लाख लोगों को आपात मानवीय सहायता दी जा रही है।
11. रूस में भी हमलों की खबरें हैं?
हाँ, रूस और क्रीमिया में ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं।
12. इन ड्रोन हमलों का असर क्या पड़ा?
तेल प्रतिष्ठानों का काम प्रभावित हुआ और कुछ हवाई अड्डे बंद करने पड़े।
13. युद्ध की शुरुआत कब हुई थी?
24 फ़रवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण शुरू किया था।
14. क्या हालिया अवधि में नागरिक हताहत बढ़े हैं?
हाँ, पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40% की वृद्धि दर्ज की गई है।
15. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपेक्षा की जा रही है?
नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और शांति प्रयासों को तेज़ करने की।
16. क्या निकट भविष्य में शांति की उम्मीद है?
वर्तमान हालात को देखते हुए शांति की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
17. आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
लगातार हमलों का डर, जान-माल की हानि और मानसिक आघात।